七宗罪
टैरिफ लगाकर अमेरिका कर रहा आर्थिक ब्लैकमेल, अर्थशास्त्री बोले- चुनौतियों से निपटने को भारत को झोंकनी होगी पूरी ताकत_我的网站

一 | आईएएनएस, नई दिल्ली। अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी टैरिफ को आर्थिक ब्लैकमेल की संज्ञा दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि ये टैरिफ भारत को आत्मसंतुष्टि और निर्भरता से मुक्त होने के लिए एक थेरेपी के तौर पर भी काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उद्योग, नीति निर्माता और राजनयिक मिलकर काम करें, तो आज का टैरिफ आतंक कल बदलाव का कारण बन सकता है।,
दुनिया एक बड़े दांव वाले नाटक को देख रही
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने कहा, आगे का काम मुश्किल है, लेकिन ईमानदारी और ठोस प्रयासों से हम इस चुनौती का सामना कर सकते हैं। सिर्फ जरूरत है पूरी रफ्तार से आगे बढ़ने और पूरी ताक से काम करने की। फिलहाल, दुनिया एक बड़े दांव वाले नाटक को देख रही है। क्या भारत झुकेगा, टूटेगा या फिर वापसी करेगा!,अमेरिकी टैरिफ की काट को भारत का 'ट्रंप कार्ड'
शुल्क लगाए जाने के बीच सरकार ने वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 50 देशों में विशेष संपर्क कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है। इस पहल के तहत ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मेक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों को शामिल किया गया है।,भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है
बता दें कि भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है, लेकिन ये 50 देश मिलकर करीब 590 अरब डॉलर का वैश्विक वस्त्र एवं परिधान आयात करते हैं। इस आयात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल महज पांच-छह प्रतिशत है।,एक अधिकारी ने कहा, 'मौजूदा परिदृश्य में इन देशों के साथ विशेष संपर्क की यह पहल बाजार विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने जा रही है। इसमें भारतीय मिशन और निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (ईपीसी) की अहम भूमिका होगी।',भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर
परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, '25 प्रतिशत शुल्क दर को तो उद्योग ने पहले ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की तुलना में 30-31 प्रतिशत तक घट गई है। इससे भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर हो गया है।'。刚不久,美国公布新的对华关税,在涉及太阳能方面将最高关税提到了50%,由于中国许多企业在东南亚设厂,然后再出口美国,因此实际对中企影响不大。
但紧接着,美国继续大行保护主义,美国认为中企通过在柬埔寨、马来西亚、泰国和越南这四个东南亚国家组装太阳能组件来规避长期存在的关税。
之前拜登免除了从这些国家进口的许多太阳能电池和组件的反规避关税,但6月就到期,美国宣布从6月6日开始,从柬埔寨、马来西亚、泰国和越南进口的太阳能产品将被征收关税。
由此可见,美国对中国企业打压就是要到极致的底部,在太阳能电池板上,华盛顿认为中国现在取消了补贴,但太阳能光伏部署依然很快,预计将在2024年实现2030年国家风能和太阳能光伏装机目标,比计划提前六年。
这就意味着大量的太阳能电池板要出口,拜登认为“防患于未然”,所以先把关税事情敲定了。
值得一提的是,美国之所以针对中国商品,理由就是“产能过剩”,为什么过剩,补贴的缘故。
然而,美国却大摇大摆的补贴太阳能——国内生产的铁、钢以及在美国开采、生产或制造的产品的制造商将获得清洁能源的生产税收抵免。根据白宫的说法,如果项目满足国内含量要求,以及其他三项专注于劳动力、能源输出或在2023年1月29日之前开始工作的要求之一,项目可以获得10%的全额奖金。
按老美自己的设想,投资的目标是建立美国工业,使太阳能等新技术的成本下降25%。
在经历了之前全球价格下跌之后,新一轮的周期中,太阳能电池板模块成本明显下降,但欧美和中国的差距进一步拉大了——2024年第一季度,中国的平均成本为57美元,而美国的平均成本为127美元。
可以说,对西方太阳能制造商来说,这些艰难时期将持续下去。

二 | 在未来两年,制造商将增加300吉瓦的太阳能电池组件年产能——相当于2023年全球总需求的70%以上。
而这些商品绝大多数依然是中国企业主导,因为无论怎么算,欧美的成本依旧要比中国高,尽管美国有补贴也一样,况且大部分美国企业不能全部享受,因为要求太高,几乎就是业链上游都在美国生产,才能拿到。
实际上,大部分原材料,美国都需要进口。所以,现在美国学者几乎都认为拜登现在出台一系列贸易措施,目的就是选票,至于当选以后,可能会是另一番情景也未可知。

三 |
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Published on:05:54:30




